Tuesday, 23 July 2019

संपत्ति मालिकों को कोर्ट से राहत नहीं Business Standard 23 July, 2019

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली July 22, 2019 उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली किराया नियंत्रण कानून की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका आज खारिज कर दी। इससे उन संपत्ति मालिकों को निराशा हो सकती है जिनकी व्यावसायिक संपत्तियां मामूली किराये पर लगे हैं और वे उन्हें खाली भी नहीं करा पा रहे हैं। अब ऐसे संपत्ति मालिक आदर्श किराया कानून बनने के बाद इसे आधार बनाकर दिल्ली किराया नियंत्रण कानून को चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं। उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने वाली और दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम के लिए निरसन समिति की अध्यक्ष शोभा अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली किराया नियंत्रण कानून की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ मकान मालिक उच्चतम न्यायालय पहुंचे थे लेकिन वहां भी याचिका खारिज हो गई। इससे संपत्ति मालिकों को राहत नहीं मिल सकी। आगे की रणनीति के बारे में अग्रवाल ने कहा कि कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा आदर्श किराया कानून के मसौदे के आधार पर कानून बनने के बाद इस कानून का आधार बनाकर भी दिल्ली किराया नियंत्रण कानून को खत्म करने के लिए याचिका दायर करने पर विचार किया जाएगा। इसमें अपील की जाएगी कि पुराने कानूनों के कारण विवादों से छुटकारे के लिए इन कानूनों को खत्म किया जाए और पुराने मामले भी आदर्श किराया कानून के तहत आने चाहिए। दिल्ली में 3,500 रुपये से कम किराये वाली संपत्ति दिल्ली किराया नियंत्रण कानून के दायरे में आती है। पुरानी दिल्ली के बड़े बाजारों से लेकर कनॉट प्लेस जैसे महंगे बाजार में कारोबारी 100 रुपये से लेकर 3,500 रुपये तक मामूली किराये पर दुकानें चला रहे हैं जबकि इन बाजारों में बाजार दर पर इन दुकानों का किराया कई हजार से लेकर लाखों रुपये में है। किराया नियंत्रण कानून के दायरे में आने से संपत्तियों पर किराया भी तीन साल में 10 फीसदी बढ़ता है।

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